When a father arranges his son's marriage, he carries the weight of two families' hopes, navigates delicate conversations, and ensures every detail reflects love and blessing. Param Pujya Mahant Swami Maharaj did exactly this for Janak Tanna. From mediating talks between the families to resolve their differences, to personally organizing the engagement ceremony, Swamishri became the bridge that united two hearts and two households. He didn't delegate this sacred responsibility — he lived it, with the tenderness of a father and the selflessness of a mother. For Janak, as for countless devotees, Mahant Swami Maharaj is not just a Guru — he is family. He shelters, guides, and loves each soul as his own, embodying the ultimate truth: that divine love expresses itself through the simplest, most human acts of care.
#MahantSwamiMaharaj #BAPS #UnconditionalLove
महंतस्वामी महाराज: माता की ममता, पिता का वात्सल्य
जब कोई पिता अपने पुत्र का विवाह तय करता है, तो वह दोनों परिवारों के बीच एक स्नेह का सेतु बनता है, नई आशाओं को संजोता है, कठिन मसलों को सुलझाता है। और वह केवल अपने आशीर्वाद ही नहीं, बल्कि इस रिश्ते के हर नाजुक मोड़ पर स्वयं साथ खड़ा रहता है। परम पूज्य महंतस्वामी महाराज ने यही किया — अपने पुत्र समान युवा भक्त जनक तन्ना के लिए। दोनों परिवारों के बीच मतभेद सुलझाने से लेकर सगाई समारोह के आयोजन तक, स्वामीश्री ने वह सब किया जो एक पिता अपने पुत्र के लिए करता है। उन्होंने यह जिम्मेदारी किसी और को नहीं सौंपी — बल्कि पिता की देखभाल और माता के त्याग के गुणों को स्वयं ने जीकर बताया। जनक जैसे अनगिनत भक्तों के लिए, महंतस्वामी महाराज केवल गुरु नहीं — स्वयं परिवार हैं। घर के मुखिया की तरह वे शरण देते हैं, मार्गदर्शन करते हैं, और प्रत्येक को अपना मानकर प्रेम करते हैं। जी हां, दिव्य प्रेम सबसे पहले अपनेपन के एहसास से जन्म लेता है।
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महंतस्वामी महाराज: माता की ममता, पिता का वात्सल्य
जब कोई पिता अपने पुत्र का विवाह तय करता है, तो वह दोनों परिवारों के बीच एक स्नेह का सेतु बनता है, नई आशाओं को संजोता है, कठिन मसलों को सुलझाता है। और वह केवल अपने आशीर्वाद ही नहीं, बल्कि इस रिश्ते के हर नाजुक मोड़ पर स्वयं साथ खड़ा रहता है। परम पूज्य महंतस्वामी महाराज ने यही किया — अपने पुत्र समान युवा भक्त जनक तन्ना के लिए। दोनों परिवारों के बीच मतभेद सुलझाने से लेकर सगाई समारोह के आयोजन तक, स्वामीश्री ने वह सब किया जो एक पिता अपने पुत्र के लिए करता है। उन्होंने यह जिम्मेदारी किसी और को नहीं सौंपी — बल्कि पिता की देखभाल और माता के त्याग के गुणों को स्वयं ने जीकर बताया। जनक जैसे अनगिनत भक्तों के लिए, महंतस्वामी महाराज केवल गुरु नहीं — स्वयं परिवार हैं। घर के मुखिया की तरह वे शरण देते हैं, मार्गदर्शन करते हैं, और प्रत्येक को अपना मानकर प्रेम करते हैं। जी हां, दिव्य प्रेम सबसे पहले अपनेपन के एहसास से जन्म लेता है।
